साधयति संस्कार भारति भारते नवजीवनम |

संस्कार भारती की संकल्पना

"'संस्कार भारती' की स्थापना १०-११ जनवरी १९८१ में लखनऊ में हुई और विगत ३६ वर्षो में किये गये अनवरत के परिणमस्वरुप यह संस्था ललित कलाओ के क्षेत्र में आज भारत का सबसे बड़ा संगठन बन चुकी है | आज देश में लगभग १६०० स्थानों पर इसकी छोटी-बड़ी इकाइयां है | संगीत,नाटक,साहित्य,चित्रकला,रंगोली,नृत्य आदि विविध क्षेत्रो के अत्यंत प्रसिद्ध शीर्षस्थ, कलाकार, गायक, अभिनेता, कवि, रंगकर्मी और शिल्पी तथा इन कलाओं मैं रूचि रखने वाले नागरिक तथा उदीयमान कलाकार बड़ी संख्या में हम से जुड़े हुए है |"

'संस्कार भारती' सभी प्रकार के सांस्कृतिक प्रदूषण का प्रबल विरोध करती है | वह कला को उपभोग की वस्तु नहीं मानती , कला को सत्ता या धन की चेरी बनने नहीं देना चाहती | वह भारतीय कलाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता को विश्वस्तर पर सुस्थापित तथा अधोरेखित करना चाहती है| सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य सामूहिकता का विकास है | किसी व्यक्तिविशेष को उछालना , किसी व्यक्तिविशेष पर आश्रित होना या किस व्यक्तिविशेष की इच्छाओ की पूर्ति या आदेशो का अनुपालन करना हमारा अभीष्ट नहीं है | इस द्रष्टि से समय-समय पर हम सामूहिक चिंतन के अभ्यास वर्ग , कार्यशालाए ,परिसंवाद का आयोजन करते रहते है , जिनके मध्यम से कलासाधको में कार्यकर्ता-भाव और कार्यकर्ताओ मैं कला-प्रेम जाग्रत होता है , दोनों एक दूसरे के पूरक बनते है और सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्त्व के कार्यक्रमों की प्रस्तुति करते है | कलासाधक अपने स्वप्नों को संगठन एवं कार्यकर्ताओ के सहयोग से मूर्त रूप प्रधान करते है |

'संस्कार भारती' भारत की प्राचीन कलाओं का संरक्षण और आधुनिक कलाओं का संवर्धन करना चाहती है | वह लोककलाओं का पुनरुत्थान भी चाहती है, और आधुनिक प्रयोगों को प्रोत्साहन भी देती है |